पंचायत चुनाव को लेकर बना टेंपों हुआ शांत

पिथौरागढ़। पंचायत चुनाव की तैयारी को लेकर बना टेंपो एक बार शांत सा हो गया है। प्रदेश सरकार पंचायत चुनाव फरवरी से पहले करा पाने की स्थिति में नहीं है। इससे पहले उसे पंचायतों का 2011 की जनगणना के अनुसार ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन करना है। उसके बाद आरक्षण की स्थिति तैयार होगी। पहले निर्धारित किया गया सीमांकन और आरक्षण कोर्ट के आदेश के बाद औचित्यहीन हो गया है। पंचायत चुनाव की तैयारी में लगे जनप्रतिनिधि इसी बात पर नजर रखे हैं कि अब पंचायतों का स्वरूप किस तरह का होगा और आरक्षण की स्थिति कैसी बनेगी।
यदि 2011 की जनगणना के अनुसार आरक्षण की स्थिति पलटती है तो कई दावेदारों को इसका खामियाजा भोगना पड़ेगा। पहले जब शासन ने 2001 की जनगणना के आधार पर आरक्षण तय किया था उसके बाद से तमाम प्रतिनिधि अपनी तैयारियों में जुट गए थे। हाईकोर्ट से मिले दिशा निर्देश के बाद स्थिति पूरी तरह पलटने वाली है। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि चुनाव में भागीदारी जरूर करेंगे। जिले में पुराने परिसीमन के अनुसार 677 ग्राम सभाएं, 299 क्षेत्र पंचायत, आठ ब्लाक प्रमुखों, 34 जिला पंचायत सदस्य क्षेत्र और एक जिला पंचायत अध्यक्ष निर्धारित था। जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लाक प्रमुख के चुनाव हर राजनैतिक दल अपनी प्रतिष्ठा मानकर चलता है। इन पदों के चुनाव को लेकर हमेशा घमासान मचता रहा है। अब लोगों की नजर नए पुनर्गठन और सीमांकन पर टिकी है।
अध्यक्ष का पद सामान्य हो गया था
पिथौरागढ़। पिछले दिनों जब शासन ने जिला पंचायत अध्यक्षों का आरक्षण का निर्धारण किया था तब पिथौरागढ़ में अध्यक्ष का पद सामान्य हो गया था। इस कारण सामान्य वर्ग के प्रत्याशी तैयारी में जुट गए थे। यदि नए पुनर्गठन के समय इसमें कोई फेरबदल होता है तो तैयारी कर रहे लोग मायूस हो जाएंगे।

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